उरई। हजरत इमाम हुसैन को 10 मुहर्रम जुमा के दिन नमाज के दौरान सजदा करते समय शहीद किया गया था। उनकी शहादत जब तक दुनियां रहेगी इमान के रास्ते पर चलने की सीख मोमिनों को देती रहेगी।
मुस्लिम वेलफेयर ऐसासिएशन के तत्वावधान में तिलक नगर स्थित पीरों वाली मस्जिद के बरकाती ग्राउंड में 42वें 10 रोजा सालाना इजलास के आखिरी दिन शुक्रवार को यह बात बिहार से आये हजरत अल्लामा सैयद आरफीन अस्दाक साहब ने अकीदतमदों को खिताब करते हुए अपनी तकरीर में कही।
आज आखिरी इजलास सुबह 9 बजे से 11 बजे तक चला। शुरू में हाफिज मोनिस चिश्ती, कलीम दानिश और कारी इसराईल अख्तर ने नात व मनकबत पढ़ी। इसके बाद हजरत अल्लामा सैयद आरफीन अस्दाक साहब ने जब इमाम हुसैन की शहादत के वाकये पर तकरीर की तो इजलास में मौजूद अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। उनके बाद मौलाना मुश्ताक साहब ने भी इस पर खिताब किया।
मुस्लिम वेलफेयर ऐसोसिएशन के जनरल सेकेट्री सारिक बेग बरकाती ने सभी अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया। महफिल में मुख्य रूप से अब्दुल रज्जाक, बासिक बेग बरकाती, शाहिद चिश्ती, सैयद इसराफील, तौसीफ रहमानी, हाजी अब्दुल बहाव, मकसूद अहमद, आकिल, कामिल, तालिब, इमरान, पन्नू, मुख्तार अंसारी, आसिफ, पम्मू, शारिफ, जावेद, दानिश बेग, रईस अहमद, रूमान, वामिक बेग आदि लोग मौजूद रहे।






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