उरई। राज्य कर्मचारी संघ परिषद के विकास भवन स्थित कार्यालय में कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच की बैठक गुरुवार को आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता महेंद्र सिंह भाटिया और संचालन युद्धवीर सिंह कंथरिया ने किया।
इस दौरान मंच के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व जब हमने अपनी मांगों को लेकर लखनऊ से दिल्ली के जंतर-मंतर तक साइकिल यात्रा निकाली थी उस समय सांसद जगदंबिका पाल ने हमारे बीच आकर पुरानी पेंशन बहाल कराने का आश्वासन दिया था। वर्तमान के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी पूर्व सरकारों के समय नई अंशदायी पेंशन को कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के लिए पत्र लिखते रहे थे। लेकिन सत्ता में पहुंचकर उन्होंने अपने आश्वासन को भुला दिया है। भूपेश अवस्थी ने कहा कि पुरानी पेंशन भीख नही हमारा अधिकार है जिस पर सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करना होगा।
बैठक में डिप्लोम इंजीनियर्स संघ के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष दिवाकर रामजी ने कहा कि वर्तमान सरकार कर्मचारियों के पेंशन का पैसा बचाकर विकास का सपना देख रही है जो कतई बाजिब नही है। कर्मचारी और शिक्षक इसे बर्दाश्त करने को तैयार नही हैं। प्रदेश के लगभग 30 लाख की संख्या में कर्मचारी और शिक्षक 8 अक्टूबर को इस मुददे पर लखनऊ घेरने का काम करेगें। डिप्लोमा इंजीनियर संघ के प्रांतीय कार्यकारी वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलएन सचान ने कहा कि कर्मचारियों को चिंता है कि उनकी नई अंशदायी पेंशन योजना में जमा धनराशि शेयर बाजार में लगाई जायेगी। ऐसे में मासिक आय की कोई गारंटी नही होगी। अपना पूरा जीवन सरकार को सेवाएं देने के बाद भी वे जीवन का अंतिम चरण अनिश्चितता में बिताने को बाध्य हो सकते हैं।
बैठक में महेंद्र सिंह भाटिया और मंच के जिला संयोजक हरीश कुमार राठौर ने प्रांतीय पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि जालौन के 40 हजार शिक्षक और कर्मचारी 8 अक्टूबर को विभिन्न साधनों से लखनऊ पहुंचकर घेराव में भाग लेगें। बैठक में गुलाब सिंह, अंगद सिंह कछवाह, रविंद्र सिंह, पुष्पेंद्र नाथ त्रिपाठी, गिरेंद्र सिंह, रमेंश फौजी, रामअवतार राठौर, श्रीमती नगेंद्रा, आरसी पस्तौर, प्रशांत सक्सेना, दिगंबर तिवारी, हरीराम ओमरे, रामसिंह आजाद, राममोहन बाजपेयी, रामराजा द्विवेदी, जय नारायण सिंह, रामबरन सिंह, योगेंद्र सिंह जादौन, विपिन उपाध्याय, विद्या सागर, नरेश निरंजन, मनीष समाधिया, लालजी पाठक, महेंद्र वर्मा, प्रेम साहू, पंचम सिंह, दिलीप कटियार, अरविंद कुमार, मानसिंह यादव, शिवधार सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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