
माधौगढ़-उरई। एक ओर जहां बार संघ की अगुवाई में वकील एसडीएम के खिलाफ तमाम आरोप लगाकर आंदोलन छेड़े हुए हैं,तो वहीं दो दर्जन से ज्यादा वकीलों ने लिखित ज्ञापन देकर एसडीएम के साथ न्यायिक कार्य करने का सहमति दे दी है। इससे वकीलों के आंदोलन की धार कुंद हो गईं है। वकीलों में ही दो गुट बन जाने से परिलक्षित होता है कि आंदोलित वकील व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते अपने कुनबे को ही नहीं सभांल सके।
विदित हो कि 23 अक्टूबर से बार संघ अध्यक्ष जितवार सिंह,कालीप्रसाद राठौर,राघवेन्द्र व्यास आदि के नेतृत्व में आधा दर्जन वकील उपजिलाधिकारी की कार्यशैली का विरोध करते हुए अनशन और आंदोलन कर रहे हैं। एसडीएम मनोज सागर के ऊपर तमाम आरोप और तहसील की समस्याओं को लेकर भाजपा समर्थित वकील की अगुवाई में शुक्रवार को कुछ वकील सांसद और भाजपा जिलाध्यक्ष से मिले लेकिन एसडीएम के खिलाफ कोई ठोस वजह न होने से भाजपा नेतायों ने वकीलों को आश्वासन देकर बैरंग लौटा दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं में ही दो गुट हो गए। जिसके बाद दो दर्जन वकीलों अखिलेश दोहरे,महेश बाबू खरे,कुवांरलाल जाटव,उमेश दोहरे,शिवकुमार,राकेश श्रीवास्तव, कृष्ण अवतार राणा,राजवीर सिंह,शशिवेंद्र सिंह,सुशील पचौरी,शिवनारायण पाल आदि ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें आंदोलन का समर्थक न माना जाए,बल्कि वह सभी जनहित में न्यायिक कार्य मे भी शामिल होंगे। आंदोलित वकीलों के पीठासीन अधिकारी/ उपजिलाधिकारी पर लगाये गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इस आंदोलन से अलग होने का ज्ञापन दिया।
बोले एसडीएम
एसडीएम मनोज सागर ने कहा है कि वह अधिवक्तायों का सम्मान करते हैं,वार्ता में कोई आपत्ति नहीं है।लेकिन लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अपने साथ किसी कर्मचारी के अलावा किसी भाजपा या संघ के नेता को नहीं ले जाता।







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