कालपेरे –उरई । आसपास क्षेत्रों मे मिठाई कारोबार मे जीएसटी चोरी का धंधा तेज चल रहा है। विदित हो कि कालपी के हलवाई तथा कारीगरों के द्वारा तैयार किया गया हलुआ तथा गुजिया की मांग लखनऊ, दिल्ली, कानपुर झांसी , मुंबई आदि जगहों मे रहती है । दूर-दूर तक के लोग खरीदारी करके कालपी से मिठाइयां ले जाते हैं। मिठाई के कारोबारी बिना बिल बाउचर के व्यापार करके सरकार को लाखों रुपए का चूना लगा रहे है। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही कर चोरी करने का मामला कई गुना आगे बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश हाथ कागज उद्योग के अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी तथा आर.के.गुप्ता के मुताबिक एक ओर हाथ कागज के उद्यमी ईमानदारी से बिजली का बिल भुगतान करते हैं । टैक्स अदा किया हुआ कच्चा माल खरीदते हैं तथा शत-प्रतिशत बिल बाउचर काट कर जीएसटी अदा करते हैं। लेकिन मिष्ठान के कारोबारी बिना खाता बही बिना बिलों के जीएसटी चोरी करने का फंडा चला रहे हैं। इससे व्यापार में असंतुलन पैदा होता है। आंकड़े बताते हैं कि मिठाइयों के कारोबार में जुड़े व्यापारी तथा दुकानदार लाखों रुपए महीने की जीएसटी चोरी करने में लिप्त बने हुए है। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि बिना बिल वाउचर के लाखों रुपए कीमत की मिठाईयां बेरोकटोक खूब बिक रही हैं। हलवाईयों के हाथों कालपी की बनी गुझिया तथा सोहन हलवे की मांग हर जगह जोरों पर है। 300 से लेकर एक हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली कालपी की गुझिया तथा मिठाईया लखनऊ, कानपुर दिल्ली, भोपाल, झांसी आदि महानगरों में विख्यात है। व्यापार जगत, उद्योगपति, उच्च अधिकारी के बीच त्योहार गिफ्ट के तौर पर कुंटलो मिठाई कालपी से जाती है। मिठाई बेचने के लिए आधा दर्जन एयर कंडीशन काउंटर शोरूम चर्चित है। आंकड़ों के मुताबिक मिष्ठान दुकानदारों की प्रतिदिन की बिक्री 30 से 40 हजार होती हैदी ।पावली के मौके पर दुकानदारी 3 से 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। लेकिन जी एस टी देने में इनकी नानी मरती है ।




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