
कालपी-उरई । राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई) के छात्रो ने कथित उत्पीड़न की घटना का मामला गरमाने लगा है । अध्ययनरत छात्रों द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच उपजिलाधिकारी सुनील कुमार शुक्ला ने नायाब तहसीलदार को सौंपी है। अगर मामले में सत्यता उजागर होती है तो कई लोगो पर गाज गिर सकती है।
स्मरण हो कि यहाँ आई.टी.आई भवन निर्मित हुये कई वर्ष बीत गये हैं। लेकिन इसी सत्र से ही शिक्षण कार्य शुरू हुआ है। बीते दिनों अंकित सिंह, प्रदीप सिंह, संजय कुमार, महमूद खान, मोहित सैनी, मामून खान आदि कई छात्रों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अवैध वसूली तथा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुये कहा था कि संस्थान में शिक्षण की वास्तविक फीस 480 रुपये है जबकि 2-2 हजार रुपये अवैध तरीके से मांगे जा रहे हैं। न देने पर उरई भेजने की धमकी दी जा रही है। छात्रों का कहना कि हम लोगों ने कालपी में दाखिला लिया है इसीलिए कक्षा भी कालपी में लगाई जाये। कालपी में ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाये।
वहीं आईटीआई के शिक्षकों का कहना है कि संस्था में 12 ट्रेड है और 8 शिक्षकों की नियुक्ति है। एक ट्रेड का शिक्षक दूसरे ट्रेड की पढ़ाई नहीं करा सकता। इसलिए व्यवस्था बनाई जा रही। उन्होंने छात्रों के लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया । लेकिन संस्थान पर उठ रही उंगलियों को लेकर जांच शुरू हो गई है। विवाद के कारण विद्यालय आये दिन बंद रहता है जिससे शिक्षा प्रभावित हो रही है।




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