रावण-वाणासुर संवादों पर दर्शकों ने पीटीं तालियां, दूल्हा-नाई के करतबों पर गूंजे ठहाके

उरई। यहां टाउन हॉल में जारी जालौन महोत्सव में विश्व प्रसिद्घ कोंच की रामलीला के सिद्घहस्त रंगकर्मियों ने धनुष यज्ञ लीला का शानदार मंचन कर दर्शकों की वाहवाही लूटी। महाराज जनक ने सीता स्वयंवर के आयोजन की घोषणा की कि जो भी शिव धनुष पिनाक को तोड़ेगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा। घोषणा के बाद देश देशांतर के राजा, भूपाल रंगशाला में पधारते हैं और धनुष उठाने के प्रयास करते हैं लेकिन वे उसे हिला भी न सके। रंगशाला में राक्षसों का राजा लंकेश रावण और दानवेन्द्र वाणासुर भी आते हैं, उनके बीच गर्मागर्म संवादों का दर्शकों ने पूरा आनंद लिया।जब विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम उसे उठा कर भंग कर देते हैं। सखियों के संग आकर जानकी सीता ने राम के गले में जयमाला पहना कर उनका वरण कर लिया|

श्री धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कोंच की एक सौ छियासठ बर्ष प्राचीन रामलीला को जिला प्रशासन द्वारा उरई में आयोजित जालौन महोत्सव में एक लीला का मंचन करने के लिये आमंत्रण मिला था जिस पर रामलीला के श्रेष्ठ और बरिष्ठ रंगकर्मियों ने वहां जाकर धनुष यज्ञ लीला का बड़ा ही रोचक मंचन किया। बिदूषक दूल्हे के रूप में उल्टी खाट पर बारात लेकर आये अभिषेक रिछारिया पुन्नी एवं नाऊ कक्का की भूमिका में सूर्यदीप सोनी ने एक घंटे तक दर्शकों का खूब मनोरंजन कराया। संरक्षक पुरुषोत्तमदास रिछारिया, निर्देशक नरोत्तमदास स्वर्णकार और सह निर्देशक संजय सिंघाल की देखरेख में इस रामलीला मंचन किया गया। व्यास की भूमिका चंद्रशेखर नगाइच मंजू ने निभाई। जनक की भूमिका बरिष्ठ रंगकर्मी रमेश तिवारी, राम हर्षित दुवे, लक्ष्मण सोम शुक्ला, सीता प्रियम शुक्ला, विश्वामित्र की केशव बबेले, विमति की अतुल शर्मा, सुमति कृष्णकांत वाजपेयी, दूल्हा अभिषेक रिछारिया पुन्नी, रावण रूपेश सोनी, वाणासुर/नाई सूर्यदीप सोनी, परशुराम मुन्नालाल पटैरया, सुनयना वीरेन्द्र त्रिपाठी, चतुर सखी गौरीशंकर झा, शतानंद रविकांत द्विवेदी, राजाओं की भूमिका में मिरकू महाराज, आलोक सोनी, बंटे रावत, गगन झा, धु्रव सोनी, प्रवीण सिंघल, सखियों में अंकुल राठौर, धु्रव सोनी घुरा, हिमांशु राठौर, दरबारी राहुल राठौर, हेमू आदि ने निभाई। रामलीला के सबसे महत्वपूर्ण सीनरी विभाग के संतोष तिवारी, मुन्नालाल अग्रवाल, गौरीशंकर अग्रवाल, संजय सोनी, पवन अग्रवाल, शंकरलाल अग्रवाल, रामविहारी सोहाने, संतोष शुक्ला टुईं, भोले अग्रवाल, गुड्डन पाटकार, बॉबी, संतोष, मारुतिनंदन आदि ने दृश्यांकन में सहयोग किया। संगीत विभाग की कमान अन्नू मलिक संभाले रहे। अंत में एडीएम प्रमिलकुमार सिंह, अयोध्याप्रसाद गुप्त कुमुद, जिविनि भगवत पटेल, प्रधानाचार्य डॉ. राकेश निरंजन आदि ने सभी कलाकारों का शॉल ओढा कर सम्मान किया।

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