कोंच-उरई । भारतीय संविधान के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर समाज के दबे कुचलों के हितों व अधिकारों को उसमें सुरक्षित करने के लिये याद किये जाने बाले बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को गुरुवार को उनके 63वें महापरिनिर्वाण दिवस पर अनुयायियों ने याद करते हुये उन्हें भावपूरित श्रद्घासुमन समर्पित किये।
दुनिया के सबसे बड़े और बहुआयामी सामाजिक तानेबाने में दबे कुचलों को उनके अधिकारों और हितों से लैस करने का काम कर गये भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनके 63वें महापरिनिर्वाण दिवस पर यहां उनके अनुयायियों ने श्रद्घापूर्वक याद किया और आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुये उन्हें श्रद्घासुमन अर्पित किये।
अखिल भारतीय बाल्मीकि महासभा के तत्वावधान में सुरेश नाहर की अध्यक्षता तथा नारायणसिंह सतोह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित श्रद्घांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उस समय जब भारतीय समाज में दलितों को हेय दृष्टि से देखकर उनके साथ दोयम दर्जे का वर्ताव किया जाता था, स्वयं डॉ. अंबेडकर को भी इन्हीं सामाजिक विद्रूपताओं की कष्टप्रद मन:स्थिति के दौर से गुजरना पड़ा था। जब उन्हें आजादी के बाद संविधान निर्माण ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने उपेक्षित तबके के उत्थान और उन्हें बराबरी का हक दिलाने के प्रावधानों का उसमें समावेश किया जिसकी बदौलत आज के भारत की तस्वीर बन सकी है। वे एक महान दार्शनिक, दूरदृष्टा और समतामूलक समाज के पक्षधर थे जिसके चलते आज वे समाज के सभी तबकों में समान रूप से आदर से देखे जाते हैं। इस दौरान जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र नाहर, सतीश नाहर, अरविंद, आनंद, कालिया, अनिल, सोनू, विपिनसिंह, अमन, विक्रम, सचिन, नीतेश, हृतिक, दीपक, विशाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।







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