कालपी। बचपन से अपना घर बार छोडक़र कालपी के यमुना तट पर अपना स्थान बनाने वाली इंदिरा बाई जी जिन्हें बाई जी के मंदिर के रूप में जाना जाता है। वह नब्बे वर्ष की आयु में बीती रात्रि ब्रह्मलीन हो गई। बड़ी संख्या में साधु संतों की की मौजूदगी में उनका यमुना तट पर अंतिम संस्कार सनातन धर्म के अनुसार उनके शिष्य शशि ने मुखाग्नि देकर किया।बुधवार की रात्रि अपना सारा जीवन कालपी जैसी रमणीक स्थली के यमुना तट पर बिताने वाली नगर की पहली महिला तेजतर्रार संत अपनी नब्बे वर्ष की आयु पूर्ण करते हुए ब्रह्मलीन हो गई। उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान कालपी नगर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नगर ही नहीं जनपद व बुंदेलखंड के नेता उन्हें मानते थे। आज उनका अंतिम संस्कार पवित्र यमुना तट पर संत समाज की बड़ी संख्या में मौजूदगी में किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी। इस दौरान महामंडेलश्वर लक्ष्मीनारायण मंदिर रामकरन दास महाराज, मां वनखंडी देवी शक्तिपीठ के महंत जमुना दास महाराज, नरसिंह टीला महंत सक्सेना बाबा, फक्कड़ बाबा कुटिया के राजा बाबा, कुन्नू महाराज, गूदड़ स्थान के राघवदास महाराज, हरिश्चंद्र दीक्षित, मलखान सिंह यादव, भारत सिंह यादव, रमेश यादव, आसू यादव, पुष्पेंद्र सिंह, अरविंद यादव, अतुल सिंह महेवा, धर्मेंद्र सिंह राजा ढाबा, रामबाबू निषाद, देवेंद्र गुप्ता, नीतू गुप्ता, दिग्विजय सिंह, नीलाभ शुक्ला, अशोक तिवारी, देवेंद्र अवस्थी, रमेश यादव आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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