जालौन। दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ एवं देवी भागवत कथा के पहले दिन पर भागवताचार्य पं. रामश्याम तिवारी कानपुर ने देवी भागवत तथा भगवत प्राप्ति की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि देवी भागवत यज्ञ का बहुत महत्व है जिसके लिए संकल्प लेकर यह आयोजन किया जाता है उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती ही है। भगवान के दर्शन से अधिक उन्हें पा लेना ही बड़ी सफलता है यानी आत्मा और परमात्मा का मिलन ही सच्चा आनंद है।नगर के चुर्खी रोड स्थित दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर परिसर में मां वनखंडी धाम कालपी के महंत जमुनादास महाराज के निर्देशन में नौ कुंडीय शतचंडी महायज्ञ और भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है जिसके पहले दिन भागवताचार्य पं. रामश्याम तिवारी कानपुर द्वारा पूर्ण विधिविधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नगर पालिकाध्यक्ष गिरीश कुमार गुप्ता, सतेंद्र खत्री, भूपेश बाथम आदि की उपस्थिति में भागवत कथा का श्रीगणेश किया गया। वहीं नौ कुंडीय श्री शतचंडी महायज्ञ में पूजा अर्चना एवं हवन कुंड में आहुतियां देने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। महिला व पुरुष भक्तों ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। यज्ञ मंडप में दुर्गा सप्तशती पाठ निरंतर जारी है। श्री शतचंडची महायज्ञ प्रारंभ होने से नगर का माहौल भक्तिमय हो गया है। श्रीमद्देवी भागवत कथा में भागवताचार्य ने भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार के बारे में श्रोताओं को विस्तृत रूप से जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने हयग्रीव राक्षस के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि इस राक्षस को वरदान था कि उसकी मौत उसके जैसे आकृति वाले के हाथों ही होगी। इसी कारण उसका वध करने के लिए भगवान विष्णु को हयग्रीव का अवतार धारण करना पड़ा था। कथा व्यास ने उक्त प्रसंग का सार बताते हुए कहा कि मीठा बोलना मधु है और कड़वा बोलना कटु। मीठे वचनों से शत्रु भी मित्र बन जाता है और कड़वे बोल से मित्र भी शत्रु। गोली का घाव तो कुछ समय बाद भर जाता है लेकिन बोली का घाव कभी नहीं भरता इसलिए मनुष्य को सदैव मीठे वचन बोलना चाहिए। इस मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। 

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