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अरविंद माधुरी तिवारी महाविद्यालय में संजोयी जाएंगी स्वर कोकिला की स्मृतियां
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लता को श्रद्धांजलि देकर उनके संघर्ष को याद किया गया
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उरई। आठ दशक तक सुरों की दुनिया ने एक छत्र राज करने वाली स्वर कोकिला ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर के जीवन संघर्ष और उनकी गायन खूबियों से विद्यार्थियों तक ले जाने के लिए अरविंद माधुरी तिवारी महाविद्यालय स्मृतियों को सहेजेगा। इस दौरान लता मंगेशकर पुरस्कार की घोषणा की गई। यह पुरस्कार हर वर्ष श्रेष्ठ विद्यार्थी को दिया जाएगा।
सरस्वती पुत्री लता मंगेशकर को भावभीनी श्रदांजलि देने के लिए कालेज में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। विद्यार्थियों ने लता के नाम पर कई स्लोगन लिखकर उनके कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व को याद किया। कालेज के प्रबन्ध निदेशक सुदामा दीक्षित ने कहा कि कोई यूं ही लता नहीं बन जाता। ऐसा बनने के लिए कठिन तपस्या करनी होती है।जिसने कभी अंधेरा नहीं देखा, वह उजाले की कल्पना नहीं कर सकता। लता दीदी के योगदान को याद करते रहने के लिए एक स्मृति कक्ष बनवाकर उनके विविध पक्षों को उसमें स्थान दिया जाएगा। विद्यार्थी वर्ग भी जान पायेगा कि लता जी आखिर खुद में क्या थीं ? सुरों की दुनियां में आठ दशक तक वह राज कैसे कर पाई। प्राचार्य डॉ. राकेश द्विवेदी ने कहा कि लता संघर्षों गुजरकर आगे बढीं। उन्होंने सदैव खुद को अपनी भूमिका पर केंद्रित किये रखा। कालेज उन्हें हमेशा याद रखने के लिए लता मंगेशकर पुरस्कार की घोषणा कर रहा है। यह पुरस्कार हर वर्ष किसी श्रेष्ठ विद्यार्थी को दिया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थी वर्ग से कहा कि कठिन चुनौतियों से संघर्ष कर जिंदगी में कैसे आगे बढ़ा जाए ? यह लता के जीवन से सीखा जा सकता है। डॉ. रचना और डॉ. अक्षरा ने कहा कि ईश्वर ने लता और स्वर को एक साथ पैदा किया। उनके गीत पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ते गये। सदियों में ऐसा कोई कलाकार पैदा होता है। रोशनी, रेणुका, साक्षी, ज्योति ने भी सरस्वती पुत्री के गुणों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अरुण कांत दुबे, जीतू, नेहा, डोली, निधि, शिवानी, खुशबू, जूली, मोहिनी, प्रदीप, सत्यम,नवनीत, रामू, विशाल, अनूप, ऋषभ, दीपराज,अनूप आदि रहे।







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