कालपी- उरई। मण्डलायुक्त डा0 आदर्श सिंह ने शुक्रवार को पर्यटन की संभावनाओं के दृष्टिगत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित तीन प्राचीन स्मारकों को देखा जिनसे इतिहास के कई महत्वपूर्ण पृष्ठ जुडे हुये हैं और जो किवदंतियों के भी केन्द्र में हैं ।
इसमें लोदी शाह का मकबरा चैरासी गुम्बद , ब्रिटिश सिमेट्री और चन्देलकालीन किला जो ध्वंस के कगार पर पहुंच गया है। कहा जाता है कि चैरासी गुम्बद विशाल बौद्ध बिहार था जिसे मुगलों के पहले के इस्लामिक लोदी शासकों ने मकबरे में बदल दिया था।
मण्डलायुक्त ने शिल्प कला के अदुभुत नमूनें भी कहे जाने इन स्मारकों का बहुत ही रूचि के साथ अवलोकन किया जिनमें स्थापत्य की विभिन्न शैलियों का समावेश दिखाई देता है। चैरासी गुम्बद की ओर और अधिक सैलानियों को आकर्षित करने के लिये उन्होंने इसके और सुन्दरीकरण पर जोर दिया । साथ ही यहां शौचालय के निर्माण के लिये सम्बन्धितों को निर्देशित किया ।
चन्देलकालीन दुर्ग जो चन्देलों का कोषागार था और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारियों की मंत्रणा का मूक साक्षी भी है कटान के कारण जीर्ण शीर्ण होकर धराशायी होने की कगार पर पहुंच गया है जिसे सुरक्षित करने के बारे में उन्होने जानकारी ली तो उन्हें जिस टीले पर यह स्थित है उसके पृष्ठ भाग से यमुना तट तक बोल्डर बिछाने के कार्य के भेजे गये स्टीमेंट के बारे में बताया गया और उन्हें जानकारी दी गयी कि बहुत अधिक लागत की वजह से इसे स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। मण्डलायुक्त ने इसे लेकर शासन में समुचित पैरवी की बात कही।
इस दौरान उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार आईएएस, मुख्य विकास अधिकारी डा0 अभय कुमार श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी मौजूद थे।








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