जालौन-उरई । विश्व मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य है कि व्यक्ति को उसके पसंद के अनुरूप जीवन जीने, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार मिले। इसी उद्देश्य के लिए बनाए रखने के लिए विश्व मानवाधिकार दिवस का आयोजन किया जाता है। यह बात जॉइन्ट स्टेट डायरेक्टर यूपी नेशनल क्राइम इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो डॉ. सोमेंद्र श्रीवास्तव ने कही।
विश्व मानवाधिकार दिवस पर डॉ. सोमेंद्र श्रीवास्तव के आवास पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें जॉइन्ट स्टेट डायरेक्टर यूपी नेशनल क्राइम इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो डॉ. सोमेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि 10 दिसंबर मनाया जाने वाला विश्व मानवाधिकार दिवस हर किसी के लिए बेहद अहम है। भारत सहित दूसरे देशों में हर किसी के लिए अपने अधिकारों का महत्व है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1950 में की गई घोषणा के बाद से यह दिवस मनाया जाता है। कहा कि मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य दुनिया का ध्यान मानवों के अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित कराना है। ताकि विश्व के सभी लोग सुरक्षित महसूस कर सकें और भेदभाव रहित स्वतंत्रतापूर्ण जीवन जी सकें। मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक व शिक्षा का अधिकार भी शामिल है। डॉ. ओसाफ अंसारी ने कहा कि भारत में 28 सितंबर 1993 को मानवाधिकार कानून को अमल में लाया गया था और 12 अक्टूबर, 1993 को ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ का गठन किया गया था। मानवाधिकार भारतीय संविधान के भाग-3 में मूलभूत अधिकारों के नाम से उल्लेखित है। इन अधिकारों का उल्लंघन करने वाले या हनन करने वाले को कानून में सजा का प्रावधान भी है। मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक, और शिक्षा का अधिकार भी शामिल है। कहा कि मानवाधिकार दिवस मानव अधिकारों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने और कोरोना महामारी के बाद फिर से जीवन शुरू करने के लिए एकजुटता का एक बड़ा अवसर है। इस मौक़े पर डॉ. अवनीश दीक्षित, डॉ. ओसाफ अंसारी, गोपालजी, चंद्रभान मिश्रा, शैलेंद्र सिंह, नीरेन्द्र नायक आदि मौजूद रहे।







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