जालौन-उरई । नगर में बेतरतीब खड़े होने वाले वाहन जाम का कारण बन जाते हैं। नगर में पार्किंग के लिए कोई निर्धारित स्थान न होने के चलते लोग मनमर्जी से जहां चाहे वहां अपने वाहन खड़े कर देते हैं। इससे राहगीरों को परेशानी होती है। इसके अलावा बेतरतीब खड़े होने वाले वाहन वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का सबब बनते हैं। जिसके चलते कभी कभार हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। इसके बावजूद जिम्मेदारों के लिए इस समस्या के लिए निपटने के लिए कोई मुकम्मल प्लान नहीं है। 

एक ओर सड़क पर वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब समय ऐसा है कि लोग सार्वजनिक वाहनों का कम से कम प्रयोग करते हैं। सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल तभी किया जा रहा है जब व्यक्ति को अधिक दूरी की यात्रा करना हो अथवा उसके पास स्वयं का वाहन न हो। कोरोना की वजह से भी स्वयं के वाहनों में यात्रा करना भी लोग सुरक्षित मानते हैं। एक ओर जहां वाहनों की संख्या बढ़ रही तो दूसरी तरफ फुटपाथ पर दुकानदारों का कब्जा हो गया है। इसके कारण वाहन चालकों को वाहन खड़े करने के लिए कोई मुफीद जगह नहीं दिखती है। ऐसे में वाहन चालकों को जहां कोई स्थान खाली नजर आता है वहीं अपना वाहन खड़ा कर देते हैं। सड़कों पर खड़े वाहनों के कारण नगर में यातायात व्यवस्था भी चरमराई रहती है और जाम की स्थिति बनी रहती है। नगर के प्रवेश द्वार देवनगर चौराहा, दीनदयाल उपाध्याय चौराहा, चुंगी नंबर 4, बालाजी मंदिर चौराहा और नगर के मुख्य बाजार के व्यस्तम चौराहा झंडा चौराहा, सब्जी मंडी, पानी की टंकी तिराहा, कांजी हाउस चौराहा समेत 10 प्रमुख चौराहे होने के बाद भी नगर में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आड़े तिरछे सड़कों पर खड़े वाहनों के चलते वाहन चालकों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। यदि जिम्मेदार इस बारे में कोई सटीक प्लान तैयार करें तो इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

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