जालौन-उरई । मानव जीवन में जितनी आवश्यकता भोजन व वस्त्र की है, उतनी ही आवश्यकता सत्संग की भी है। सत्संग से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है। इसलिए जहां भी सत्संग होता मिले उसमें अवश्य ही बैठें। यह बात सिकरी राजा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित आंनद शास्त्री वृदांवन ने कही।
क्षेत्रीय ग्राम सिकरीराजा में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तीसरे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे पंडित आनंद शास्त्री ने उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा समाज का दर्पण है। भागवत कथा सुनकर मन व आत्मा तृप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से लोग अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। सत्संग के माध्यम से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है। मानव जीवन में जितनी आवश्यकता भोजन व वस्त्रों की है उतनी ही आवश्यकता सत्संग की भी है। समाज को सही दिशा व ज्ञान भागवत कथा के द्वारा ही होता है। कलयुग में साक्षात परमात्मा का दर्शन एवं साक्षात्कार श्रीमद भागवत कथा महापुराण है। इस मौके पर परीक्षित लल्लू उपाध्याय, राजपाल राजावत, साहब सिंह, अजित गौर, रामकुमार, रामप्रकाश दौहलिया आदि मौजूद रहे।







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