ऋषिकेश। गंगा तट स्थित परमार्थ निकेतन में प्रमुख आध्यात्मिक गुरु पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के 74 वर्ष पूर्ण कर 75वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर देशभर से आए संत-महात्माओं का भव्य समागम आयोजित किया गया। इस अवसर पर जल, पर्यावरण एवं नदी संरक्षण को लेकर गंभीर चिंतन हुआ तथा विशेष रूप से यमुना नदी की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि शीघ्र ही दिल्ली में यमुना नदी के तट पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, संत समाज, केंद्र सरकार के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यमुना को अविरल और निर्मल बनाने का संकल्प लेंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल यमुना पुनर्जीवन अभियान को नई दिशा प्रदान करेगी।
इस दौरान संतों ने घोषणा की कि दिल्ली में यमुना तट पर 10 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रपति के माध्यम से यमुना संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए प्रभावी पहल किए जाने का भी आह्वान किया गया। संतों ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
संत समाज द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक संकल्प ने यमुना संरक्षण के लिए निकली जल सहेलियों की 500 किलोमीटर लंबी यमुना यात्रा की स्मृतियों को भी ताजा कर दिया। यह यात्रा जालौन जिले के पचनदा से दिल्ली तक आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य यमुना की अविरलता और निर्मलता के प्रति जनजागरण करना था।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा उरई ने संदेश देते हुए कहा कि माँ यमुना के प्रति जल सहेलियों और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माँ यमुना सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएंगी तथा उनकी अविरलता और निर्मलता के लिए देशव्यापी जन-जागरण का सकारात्मक वातावरण तैयार होगा।
संतों ने कहा कि यह संकल्प केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, निर्मल और जीवनदायिनी नदियों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




Leave a comment