झाँसी/दिल्ली /जालौन । मूलतः उरई (जनपद जालौन), बुन्देलखण्ड के निवासी एवं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के पीएच.डी. शोधार्थी प्रभात दुबे भारतीय पत्रकारिता के शिखर पुरुष, वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्मश्री आलोक मेहता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर शोध कार्य कर रहे हैं। उनका शोध विषय “भारतीय पत्रकारिता में आलोक मेहता का योगदान : मीडिया एवं राजनीति के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन” है। यह शोध भारतीय पत्रकारिता के इतिहास, उसके मूल्यों, मीडिया की सामाजिक भूमिका तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया और राजनीति के अंतर्संबंधों का गहन एवं तथ्यपरक अध्ययन करेगा।

इसी क्रम में प्रभात दुबे ने नई दिल्ली स्थित आवास पर पद्मश्री आलोक मेहता से आत्मीय भेंट कर उनका स्नेहिल आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर भारतीय पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, लोकतांत्रिक मूल्यों, मीडिया की विश्वसनीयता, जनसरोकारों तथा शोध की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई।

पद्मश्री आलोक मेहता भारतीय पत्रकारिता के उन विरले व्यक्तित्वों में हैं, जिन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक निर्भीक, निष्पक्ष, जनपक्षधर एवं मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के माध्यम से देश में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वे 27 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं तथा नई दुनिया, हिंदुस्तान समाचार, साप्ताहिक हिंदुस्तान, वॉयस ऑफ जर्मनी, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, आउटलुक, गवर्नेंस नाउ तथा आईटीवी नेटवर्क सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में संपादक, प्रधान संपादक, संपादकीय निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अपनी उल्लेखनीय सेवाएँ दे चुके हैं। वे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एवं महासचिव, भारतीय प्रेस परिषद, राष्ट्रीय एकता परिषद तथा भारतीय जनसंचार संस्थान की प्रबंध समिति के पूर्व सदस्य भी रहे हैं।

पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट एवं बहुआयामी योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2009 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान “पद्मश्री” से अलंकृत किया। इसके अतिरिक्त उन्हें गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, पत्रकारिता भूषण सम्मान, राष्ट्रीय तुलसी सम्मान, राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

खोजी एवं जनपक्षधर पत्रकारिता के क्षेत्र में पद्मश्री आलोक मेहता का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। बिहार के चर्चित चारा घोटाले को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने लाने तथा उसे व्यापक जनचर्चा का विषय बनाने में उनकी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी प्रकार हरियाणा के चर्चित चौटाला प्रकरण सहित अनेक राष्ट्रीय महत्व के मामलों पर उनकी तथ्यपरक, निर्भीक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग ने सत्ता एवं व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी लेखनी सदैव सत्य, पारदर्शिता, जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़ी रही है, जिसके कारण वे भारतीय पत्रकारिता के सबसे सम्मानित और विश्वसनीय नामों में गिने जाते हैं।

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी उत्तर प्रदेश का एक प्रतिष्ठित राज्य विश्वविद्यालय है, जो उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विश्वविद्यालय का जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग समाजोपयोगी एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। प्रभात दुबे का यह शोध भारतीय पत्रकारिता के इतिहास, मूल्यों और योगदान के अकादमिक दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

यह शोध केवल एक वरिष्ठ पत्रकार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का अध्ययन नहीं होगा, बल्कि भारतीय मीडिया के बदलते स्वरूप, पत्रकारिता की नैतिकता, लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व, जनसरोकारों तथा मीडिया और राजनीति के अंतर्संबंधों का भी व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करेगा। शोध के निष्कर्ष पत्रकारिता के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, मीडिया शिक्षकों, पत्रकारों तथा नीति-निर्माताओं के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराएंगे। साथ ही यह अध्ययन नई पीढ़ी के पत्रकारों को निष्पक्ष, उत्तरदायी, तथ्यपरक एवं जनहितकारी पत्रकारिता के आदर्शों से परिचित कराएगा तथा समाज में विश्वसनीय, उत्तरदायी और मूल्यनिष्ठ मीडिया को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

भेंट के दौरान पद्मश्री आलोक मेहता ने प्रभात दुबे को शोध कार्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य, निष्पक्षता, जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होना चाहिए। उन्होंने शोध को समाज एवं पत्रकारिता दोनों के लिए उपयोगी बनाने पर बल दिया।

प्रभात दुबे ने कहा कि यह शोध उनके लिए केवल एक शैक्षणिक दायित्व नहीं, बल्कि भारतीय पत्रकारिता के एक युगदृष्टा के जीवन, विचारों, मूल्यों और योगदान को शोध के माध्यम से संरक्षित कर समाज, मीडिया जगत एवं आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का विनम्र प्रयास है।

इस अवसर पर प्रभात दुबे के साथ उनके मित्र मृत्युंजय कुमार भी उपस्थित रहे।

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