टाटा की 7.5 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनों से लैस लैब में रोबोटिक्स, थ्री-डी प्रिंटिंग और ऑटोमेशन का प्रशिक्षण; 80 छात्रों का पहला बैच डिप्लोमा पूरा कर चुका, नौकरी की गारंटी से जगी उम्मीद
उरई (जालौन)। कभी कबाड़ और बेरोजगार नौजवानों के अड्डे के रूप में देखे जाने वाले औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की पहचान अब बदल रही है। जिस संस्थान को लेकर कभी यह तंज कसा जाता था कि यहां पढ़ाई के बजाय कुछ छात्र तमंचे तराशने का हुनर सीख बैठते हैं, उसी परिसर में अब रोबोटिक्स और अत्याधुनिक औद्योगिक तकनीक के जानकार तैयार किए जा रहे हैं। उरई आईटीआई परिसर में बनी टाटा लैब की खूबसूरत इमारत इस बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रही है।
देश की प्रतिष्ठित टाटा कंपनी ने इस लैब में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की हैं। इनकी मदद से छात्रों को रोबोटिक्स, थ्री-डी प्रिंटिंग, ऑटोमेशन और उद्योगों की नई जरूरतों से जुड़े तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लैब में टाटा की ओर से करीब आधा दर्जन पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कुछ एक वर्ष के तो कुछ दो वर्ष के डिप्लोमा कोर्स हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि केवल मशीनें लगाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं मान ली गई है। टाटा ने दो वर्ष के लिए अपने इंस्ट्रक्टर भी आईटीआई उरई में तैनात किए हैं। वे संस्थान के संबंधित ट्रेड के कर्मचारियों और छात्रों को इन आधुनिक मशीनों पर काम करने के लिए दक्ष बनाएंगे। इससे छात्रों को किताबी जानकारी के साथ उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक का व्यावहारिक अनुभव भी मिल सकेगा।
आईटीआई के प्रधानाचार्य मान सिंह के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत 80 छात्रों का एक बैच एक वर्ष का डिप्लोमा पूरा कर चुका है। टाटा ने इन छात्रों को अपने यहां तत्काल नौकरी देने की गारंटी भी दी है। यदि यह व्यवस्था लगातार आगे बढ़ती है तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं और उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण के बाद नौकरी की तलाश में भटकने से राहत मिल सकती है।
दरअसल, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रही है कि वहां मिलने वाला प्रशिक्षण उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप हो और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को रोजगार भी मिले। उरई आईटीआई में टाटा की यह पहल इसी चुनौती का जवाब बन सकती है। रोबोटिक्स, थ्री-डी प्रिंटिंग और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण युवाओं को पारंपरिक ट्रेड से आगे बढ़कर आधुनिक उद्योगों के लिए तैयार करने का अवसर देता है।
उरई आईटीआई की यह बदलती तस्वीर उस पुरानी धारणा को भी चुनौती देती है, जिसमें ऐसे संस्थानों को बेरोजगार युवाओं के लिए महज एक ठिकाना समझ लिया जाता था। अब यहां की लैब उम्मीद जगाती है कि सही संसाधन, प्रशिक्षित मार्गदर्शन और रोजगार से जुड़ा प्रशिक्षण मिले तो वही नौजवान आधुनिक तकनीक के कुशल कारीगर बन सकते हैं, जिनके भविष्य को कभी अंधेरी सुरंग में फंसा हुआ माना जाता था।
कभी जिस आईटीआई में दाखिला लेकर हुनरमंद बनने की उम्मीद को गूलर के फूल जैसी दुर्लभ चीज समझा जाता था, वहां अब युवाओं को तकनीकी दक्षता और रोजगार का अवसर मिलता दिख रहा है। टाटा लैब की यह इमारत महज एक खूबसूरत भवन नहीं, बल्कि उरई के युवाओं के बदलते भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक है।







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